Latest

6/recent/ticker-posts

रहीम के दोहे



रहीम के दोहे 



रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो छिटकाय 
टूटे से फिर ना मिले मिले गाँठ पड़ जाय 


 रहिमन एक दिन वे रहे बीच न सोहत हार 
वायु जो ऐसी बह गई बीचन परे पहार 

 सीत हरत तम हरत नित भुवन भरत नहिं चूक 
'रहिमन' तेहि रबि को कहा जो घटि लखै उलूक 


 रहिमन नीच प्रसंग ते नित प्रति लाभ विकार 
नीर चोरावै संपुटी मारु सहै घरिआर 


 रहिमन जिह्वा बावरी कहिगै सरग पताल 
आपु तो कहि भीतर रही जूती खात कपाल 


 माँगे मुकरि न को गयो केहि न त्यागियो साथ 
माँगत आगे सुख लह्यो, ते 'रहीम' रघुनाथ 


 रहिमन बिगरी आदि की बनै न ख़र्चे दाम 
हरि बाढ़े आकाश लौं तऊ बावनै नाम 


 रहिमन कठिन चितान ते चिंता को चित चेत 
चिता दहति निर्जीव को चिंता जीव समेत 


 सदा नगारा कूच का बाजत आठों जाम 
'रहिमन' या जग आइ कै को करि रहा मुकाम 


 'रहिमन' ओछे नरन सों बैर भलो ना प्रीति 
काटे चाटै स्वान के दोऊ भाँति विपरीति 


 बिरह रूप घन तम भयो अवधि आस उद्योत 
ज्यों रहीम भादों निसा चमकि जात खद्योत 


 समय दसा कुल देखि कै सबै करत सनमान 
'रहिमन' दीन अनाथ को तुम बिन को भगवान 


 हरि 'रहीम' ऐसी करी ज्यों कमान सर पूर 
खेँचि आपनी ओर को डारि दियो पुनि दूर 


 लालन मैन तुरंग चढ़ि चलिबो पावक माँहिं 
प्रेम-पंथ ऐसो कठिन सब कोउ निबहत नाहिं 


 'रहिमन' ये तन सूप है लीजै जगत पछोर 
हलुकन को उड़ि जान दै गरुए राखी बटोर 


 'रहिमन' पैड़ा प्रेम को निपट सिलसिली गैल 
बिछलत पाँव पिपीलिका लोग लदावत बैल 


 लोहे की न लोहार की 'रहिमन' कही बिचार 
जो हनि मारे सीस में ताही की तलवार 


 'रहिमन' वित्त अधर्म को जरत न लागै बार 
चोरी करि होरी रची भई तनिक में छार 


 'रहमन' गली है सॉकरी दूजो ना ठहराहिं 
आपु अहै तो हरि नहीं हरि तो आपुन नाहिं 


 सरवर के खग एक से बाढत प्रीति न धीम 
पै मराल को मानसर एकै ठौर 'रहीम' 

 रोल बिगाड़े राज नै मौल बिगाड़े माल 
सनै सनै सरदार की चुगल बिगाड़े चाल 


 मथत मथत माखन रहै दही मही बिलगाय 
'रहिमन' सोई मीत है भीर परे ठहराय 


 रहिमन तीर की चोट ते चोट परे बचि जाय 
नैन बान की चोट ते चोट परे मरि जाय 

 रहिमन खोज ऊख में जहाँ रसन की खानि 
जहाँ गाँठ तहँ रस नहीं यही प्रीति में हानि

सबै कहावै लसकरी सब लसकर कहँ जाय 
'रहिमन' सेल्ह जोई सहै सो जगीरै खाय 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ