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बाल कवितायेँ




बाल  कवितायेँ 


इब्नबतूता पहन के जूता
निकल पड़े तूफान में
थोड़ी हवा नाक में घुस गई
घुस गई थोड़ी कान में

कभी नाक को, कभी कान को
मलते इब्नबतूता
इसी बीच में निकल पड़ा
उनके पैरों का जूता

उड़ते उड़ते जूता उनका
जा पहुँचा जापान में
इब्नबतूता खड़े रह गये
मोची की दुकान में


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बन्दर मामा  पहन पैजामा
दावत खाने आये।
ढीला  कुरता , टोपी, जूता
पहन बहुत इतराए।
रसगुल्ले पर जी ललचाया,
 मुँह में रखा गप से।
नरम नरम था, गरम गरम था,
जीभ जल गई लप से।
बन्दर मामा रोते रोते
वापस घर को आए।
फेंकीं टोपी, फेंका जूता,
रोए और पछताए।

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लालाजी ने केला खाया


केला खा के मुंह पिचकाया


मुंह पिचका के कदम बढाया


पैर के नीचे छिलका आया


लालाजी तो गिरे धड़ाम


मुंह से निकला हाय राम हाय राम हाय राम


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चुन्नू ,मुन्नू थे दो भाई ,


रसगुल्ले पे हुई लड़ाई


चुन्नू बोला मैं ही लूँगा ,


मुन्नू बोला मैं खाऊंगा


हल्ला सुन कर मम्मी आई ,


दोनों को दो चपत लगाई


कभी ना लड़ना ,


कभी ना झगड़ना ,


आपस में तुम मिलके रहना ..

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तितली उड़ी, उड़ के चली
फूल ने कहा
आजा मेरे पास
तितली कहे मैं चली आकाश

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हठ कर बैठा चाँद एक दिन माता से यह बोला
सिलवा दो माँ मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला
सन सन चलती हवा रात भर जाडे में मरता हूँ
ठिठुर ठिठुर कर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ
आसमान का सफर और यह मौसम है जाडे का
न हो अगर तो ला दो मुझको कुर्ता ही भाडे का
बच्चे की सुन बात कहा माता ने अरे सलोने
कुशल करे भगवान लगे मत तुझको जादू टोने
जाडे की तो बात ठीक है पर मै तो डरती हूँ
एक नाप में कभी नहीं तुझको देखा करती हूँ
कभी एक अंगुल भर चौडा कभी एक फुट मोटा
बडा किसी दिन हो जाता है और किसी दिन छोटा
घटता बढता रोज़ किसी दिन ऐसा भी करता है
नहीं किसी की भी आँखों को दिखलाई पडता है
अब तू ही यह बता नाप तेरा किस रोज़ लिवायें?
सी दें एक झिंगोला जो हर रोज़ बदन में आयें?

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बिल्ली मौसी बिल्ली मौसी  
कहो कहाँ से आई हो.
कितने चूहे पकड़े तुमने,
कितने खा कर आई हो.
क्या बताऊ शीला बहन,
आज नहीं कुछ पेट भरा
एक ही चूहा खाया मैंने
वो भी बिलकुल सडा हुआ

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आयी दीवाली, आयी दीवाली, आयी दीवाली रे
दीप जलाओ, ख़ुशी मनाओ, आयी दीवाली रे
खूब चले फुलझड़ी पटाखे, आयी दीवाली रे
सबको बांटों खूब मिठाई,आयी दीवाली रे
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कितना सुन्दर फूल कमल का,
सबके मन को भाता है.
कीचड़ में भी खिलना सीखो,
हमको ये सिखलाता है.
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चुन चुन करती आई चिड़िया,

दाल का दाना लायी चिड़िया,

मोर भी आया, कौवा भी आया,

चूहा भी आया, बन्दर भी आया.

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नानी नानी सुनो कहानी
एक था राजा एक थी रानी
राजा बैठा घोड़े पर
रानी बैठी पालकी पर
बारिश आई बरसा पानी
भीगा राजा बाख गयी रानी

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मछली जल की रानी है ,


जीवन उसका पानी है ,




हाथ लगाओ, डर जायेगी ,


बाहर निकालो, मर जायेगी .

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पापा जी का डंडा गोल,
मम्मी जी की रोटी गोल,
नानी जी की ऐनक गोल,
नाना जी का पैसा गोल,
बच्चे कहते लड्डू गोल,
मैडम कहतीं दुनिया गोल।

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कहे कबूतर गुटरूगूं-गुटरूगूं भाई गुटरूगूं
बोलूं या चुप हो जाऊं,
रूकूं यहां या उड़ जाऊं,
दाने बिन बिन कर खाऊं,
दुपहर है क्या सुस्ताऊं ?
कहो कहां पर छिप जाऊं,
नहीं यहां पर फिर आऊं?
बार-बार तुम से पूछूं,
जो भी कह दो वही करूं,
गुटरूगूं भाई गूटरूगूं।
लेकिन इतना मुझे पता,
देता हूं मैं अभी बता,
जिस दिन चला गया उड़कर
देखा फिर ना इधर मुड़कर।
तुम पीछे पछताओगे,
बस मन में दुहराओगे,
अब मैं कैसे, कहां सुनूं,
गुटरूगूं भाई गुटरूगूं।

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फूलों से तुम हँसना सीखो,
भंवरों से नित गाना।
वृक्षों की डाली से सीखो,
फल आए झुक जाना।
सूरज की किरणों से सीखो,
जगना और जगाना।
लता और पेड़ो से सीखो,
सबको गले लगाना।
दूध और पानी से सीखो,
मिल जुलकर सबसे रहना।
अपनी प्रिय पृथ्वी से सीखो,
>हँस हँस सब कुछ सहना।

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